माँ, आपके जैसा यार कहाँ, मिसाल कहाँ

आपका साथ जो पाया, भटका हुआ या भोज से दबा कोई,
छोड़ चले सारे अंधेरें, लहक चले सारे वो नज़ारे
आपकी ममता की चिराग में, हैं चमकते बेशुमार ऐसे उजाले,
कहीं शर्माके छुप न जाए, सूरज, चाँद और सारे वो तारे

माँ, आपके जैसा यार कहाँ, मिसाल कहाँ

किस्मत ऐसा बेरहम खेल, कभी किसी मासूम से न खेलें,
जो माँ की गोद और ममता से, बिछड़के मजबूरन जीना पड़े,
दिन-बा-दिन, ले आये राहों में आपके, कितने ऐसे सितम,
जानि न ये दुनिया, कितने ऐसों पतझड़, छेड़ते चले हरदम

माँ, आपके जैसा यार कहाँ, मिसाल कहाँ

हम अव्वल आये न आये, या बनके फिरे आवारा बादल
दे दी हमें पूरी आजादी, बिना संकोच, बिना कोई सवाल,
दिए की ज्योति हो, या स्कूल की इम्तिहान, रह जाती अधूरी
आपके बगैर, जैसे बिन रौशनी के, रातों के जुगनूं

माँ, आपके जैसा यार कहाँ, मिसाल कहाँ

घडी दो घडी की, घडी भी शायद चुरा ले आराम के दो पल,
आपके क़दमों ने रुकने की न बात छेड़ी, न ख़याल,
स्कूल में, न घर में, कभी न ले पायी साँस फुर्सत की
मुकम्मल करती गई, मांग और मनमानी, अपने पराये की

माँ, आपके जैसा यार कहाँ, मिसाल कहाँ

हर वो तनहा शाम, सुन्दर सपना देखता, आपकी परछाई बनके सवर,
हर वो सुन्दर लम्हा, शाम ही से तरसता, आपकी पनाह लेके गुज़र,
पिताजी की मीठी आदत भी आप, और तीखा ज़रुरत भी,
आप ही में पिघलना सीखा, नाराज़गी उनकी, और चिड़चिड़ाहट भी

माँ, आपके जैसा यार कहाँ, मिसाल कहाँ

कोई बुरा करें या बाला, आपने हमेशा ही चाहा सबकी भलाई,
सारी उम्र हमारे इरादों और आशाओं को सुधारने में बिताई
देर सही, अब तो ज़िन्दगी का मज़ा लूटो, अपने रंग भरने में
अब न वक़्त काटना, किसीकी आरज़ू में, और न इंतज़ार में

माँ, आपके जैसा यार कहाँ, मिसाल कहाँ