फूल कुछ ऐसे भी हैं चमन के, जो खिलते हैं, सिर्फ अंधियारे की दामन में
नज़ारे कुछ ऐसे भी हैं ज़िन्दगी के, जो उबरते हैं, सिर्फ हमारी ग़ैर हाज़री में