हर रात अलग थी
हर रात का एक नाम था
वही याद में जिए जा रहे हैं
वही लम्हों के साये ढूंढे जा रहे हैं

हर राग शामिल थी
हर राग एक दुल्हन बनी सजी थी
वही पलकों का सेज खींचे जा रही हैं
वही पल दो पल का आसरा लिए बैठें हैं

हर रात अलग थी
हर रात का एक नाम था

हर घडी रंग लाई
हर घडी गुलाब का फूल बनके नज़र आयी
वही समुन्दर की लहरें, वही अध ख़िला चांद
वही रुकी साँसें, वही बेकरार दिल

हर हवा जवान थी
हर हवा बहार-ए-उम्र का पैगाम था
वो लहरों का क़रार, दूर भी हैं और नहीं भी
वो चाहतों का दामन, पास भी हैं और नहीं भी

हर रात अलग थी
हर रात का एक नाम था