गगन का एक महल हो, तारों का एक छत हो
अरमानों को खुला आंगन हो, ख्वाबों का लम्बा दरख़्त हो
इतवार का इत्मीनान हो, शबनम का शबाब हो
सागर की झिलमिल हो, संगमरमर की शान हो
दीवानों का महफ़िल हो, हमदर्दों का साथ हो
रेशम का सामान हो, रात का चिलमन हो
आँखों का सेज हो, पल्खों का चादर हो
इस से ज्यादा और क्या मिसाल हो
मेरे मेहबूब की और क्या पहचान हो !