तू नहीं, तो मैं नहीं
तेरा सिवा, मेरा कोई नहीं
ये पल, आया भी तो कैसा
दिल इतना, उतावला हुआ कैसा
मेरी लाड़ली, मेरी सलोनी
नाजुक सी पली, रानी हमारी
तेरे हाथ में था मेरा हाथ
छूट गया ये कब, तेरा हाथ
सूरज नया, चाँद नया
लगता नहीं, दिल मेरा यहाँ
कितना अच्छा होता अगर
यूं ही चलता जाए, हमारा सफर
सुनाना था, तुम्हे एक तराना
यहाँ वहाँ डुंडा, तो जाना
अकेले ही, गुनगुनाना होगा हर वो गाना
मोड़ ये कैसा ले आया, रफ़्तार-ए-ज़माना
ऐसे जज़्बात का, पहले भी हुए हम शिकार
घंटों की दूरी ने किया हमें, थोड़ा बेकरार
अब के वार का होने लगा, ऐसा असर
दिनों और महीनों में, टूट न जाए दिल-ए-करार
यादों का कारवां, लो हो गई शुरू
साज़िश रचाने की, लो पूरी हुई इनकी आरज़ू
रुलाने की है, इनमें जिद बड़ी
कैसे हम संभल पाए, है दिक्कत बड़ी
काश थोड़ी देर और, रुक पाता
तुम्हारी आँखों की बेबसी, मैं पढ़ पाता
कितना बुजदिल और बेरहम, निकला ये बाप
तुझे अकेला लाचार छोड़कर, चल दिया तेरा बाप
उड़ने की चाह से है बेताब तेरे पंख
हो चाहे थोड़े उदास, नमी सी तेरी आंख
दुनिया का है ये रिवाज, पुराना
हर प्राणी को है ये रीत, दोहराना
खोया कुछ हमारा भी है, और कुछ तुम्हारा
इम्तिहान ये, हमारा भी है और तुम्हारा
हाँ, सैकड़ों है दुश्मन, जब हो तू अकेला
पर, हौसला भी तो हुआ बुलंद, जब चला तू अकेला